बहुराष्ट्रराज्य विखंडन कि ओर और राज्यराष्ट्र एकता के डोर

रामध्यान राय

राज्यराष्ट और राष्ट्रराज्य सुनेमे समान शब्द जैसन है । न बुझ्बी तबतक लागी की शब्द अगाडी पछाड़ी मात्र राखल गेल है । लेकिन यी बहुत ही संवेदनशील और जटिल विषय है, येइमे हमनीके लापर्बाहीसे वैदिककालसे अविच्छिन्न रहल नेपालके भूराजनीतिक मान्यताके अस्तित्व भी ख़तम हो सकी छै । यी कोनो मजाकके बात न है, आऊ हम सब एकबार अच्छासे राज्यराष्ट और राष्ट्रराज्य दुनुके तुलना और संसारके घटना क्रम पर सूक्ष्म तरीका बिश्लेषण करी छि ।

जैसे तत्कालीन यूगोस्लाविया और सोभियत संघ टुकरा टुकरा भेके बिखर गेल उहे अवस्था अपना नेपालमे भी आसकी छै और जानी या न जानी बहुत ब्यक्ति सब, शब्द जालमे परके ओइसब के अजेंडामें सहयोग भी कर रहल है ।
राज्यराष्ट्र और राष्ट्रराज्य २ विपरीतार्थक पृथक सिद्दान्त है ।

राज्यराष्ट्र सिद्दान्तके जड़ नेपालके मौलिक धार्मिक संप्रदायके ग्रन्थ सब बिशेषत: वैदिक ग्रन्थ , बौद्धके पीटक ग्रन्थ और किरांत के मुन्धुममें हम सब देख सकी छि और दोसर तरफ राष्टराज्य सिद्दान्त के जड़ तत्कालीन यूरोपके क्याथोलिक और प्रोटेस्टान्ट संप्रदाय बिच होएल युद्धके बाद वेस्टफ्यालिया के संधिके बाद अस्तित्व में आएल है ।

राज्यके मतलव मूलत: व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका सब, जोन मानव निर्मित संरचनाके समष्टि है । कौटिल्यके अनुसार स्वामी, अमात्य , जनपद, कोष, दुर्ग, दंड और मित्र यी ७ गो तत्व राज्यके अंग हैइ । वर्तमान समयमें संचार क्षेत्र , नागरिक समाज और व्यवसायीके संजाल भी राज्यके अंगमें समावेश कएल गेल तथा एइपर लेख भी उपलब्ध है । राज्यके परिभाषा समय और परिस्थिति अनुसार फरक कएलाके बाबजूद एइसे कोनो बड़ा समस्या न परल है ।
समस्या राष्ट्रके परिभाषामें है । राष्ट्रके मतलव की है त ? राष्ट्रके परिभाषा पुर्वीय और पश्चिम मान्यताके बिच तुलना कके बुझे परती । तत्कालीन बोहेमियाके राजा फर्डिनांड दोसर अपने क्याथोलिक क्रिश्चियन होएला के कारण अपना क्षेत्रके क्याथोलिक सम्प्रदायके प्रबर्धन करे लागल और प्रोटेस्टान्ट संप्रदायके ऊपर दमन । ओकरे फलस्वरूप प्रोटेस्टान्ट क्रिश्चियन सबमें असंतोषके ज्वार फुट गेल और दोनों संप्रदायमें आपसी मतभेदके शुरुवात ।

बोहेमिया और आस्ट्रियाके बिच बिद्रोह शुरू भेगेल । युरोपे भर क्याथोलिक और प्रोटेस्टान्टके बिच भिडंत उग्र रूपसे फ़ैल गेल । सन १६१८ में शुरू भेल द्वन्द ३० वर्ष तक चलल । व्यापक धनजनके क्षति होएलाके बाद सन १६४८ में जर्मनी के वेस्टफेलिया संधि पश्चात द्वन्द पर विराम लागल । संधिसे आदमी जन्मसे प्राप्त विशेषता जैसन जाती, भाषा, रंग, संप्रदाय ही “राष्ट्र/राष्ट्रीयता” मानेके और ओई “राष्ट्र/राष्ट्रीयता”में आधारित रहके राज्य निर्माण करे के मान्यता स्थापित भेल । दु इसाई पंथ बिचके ध्वंसात्मक युद्ध पर विराम देबेला कएल गेल संधि के प्रभाव धार्मिक संप्रदाय पर राष्ट्रीयता आधार बनाबेके राज्य निर्माणमें मात्र सिमित न रहके इ जाती, प्रजाति, भाषिक समुदाय, सांस्कृतिक एवं क्षेत्रीय पहिचानके आधार पर राज्य निर्माण करेके लेल रस्ता खुल गेल ।
ओकरा बाद यूरोपमे जाती, प्रजाति, भाषिक समुदाय , धार्मिक संप्रदाय के राष्ट्रीयता कहेके प्रचलन शुरू भेलै और ओही राष्ट्रीयता पर आधार रखके बहुत देश सब अस्तित्वमें आएल । जैसे अंग्रेज बोलेवाला के लागी ब्रिटेन, जर्मन बोलेवालाके लागी जर्मनी, फ्रेंच बोलेवालाके लागी फ्रांस, स्पानिस बोलेवालाके लागी स्पेन । येही पर आधारित होकर निर्माण भेल राज्य के ही राष्ट्रराज्य के रुपमे परिभाषित कएल जाई छै । कोनो राज्यके सीमा भितर एके किसिमके जाती, प्रजाति, भाषिक,समुदाय वा धार्मिक संप्रदाय मात्र है त उ राष्ट्रराज्य सिद्दान्तके आदर्श बन्न गेल । यदि राज्यके अन्दर २ टा फरक जाती, प्रजाति, भाषा अथवा धार्मिक संप्रदाय रहे त उ द्वि – राष्ट्रीय राज्य और २ से जादा है त बहु-राष्ट्रीय राज्य के रुपमे परिभाषित कएल गेल ।

द्वि-राष्ट्रराज्य :
सन १९९३ तक अस्तितमें रहल चेकोस्लोवाकिया नामके देश द्विराष्ट्रीय राज्य रहल । सन १९६० में जारी कएल चेकोस्लोवाकिया के संविधान घोषणा के समय में चेक राष्ट्र ( चेक जाती ) और स्लोवाक राष्ट्र ( स्लोवाक जाती ) मिलके चेकोस्लोवाकिया नामके राज्य निर्माण होएल रहे । चेक जाती और स्लोवाकिया जातिके राष्ट्र के आधार मानके स्थापित होएल चेकोस्लोवाकिया देश स्थापना होयेलाके जम्मा ३ दशक में ही बिघटन / टुकरा होके चेक गणतन्त्र और स्लोवाक गणतन्त्र नामक २ टा देश बनल । और यी घटनाके मुख्य जड और कारण संबिधान में लिखल द्वि – राष्ट्रीय राज्य के आधार ही रहे ।
अपन पडोसी देशमें सन १९४७ तक बेलायती साम्राज्य रहल तत्कालीन इण्डिया स्वतंत्र होएके क्रम में रहे लेकिन धर्मके आधार पर तत्कालीन इण्डिया द्वि – राष्ट्रीयके आधार मानके इन्डिया और पाकिस्तान बनल । सन १९७१ फेर पूर्वी पाकिस्तान और पश्चमी पाकिस्तान भाषाके आधार द्वि – राष्ट्रीय राज्यके आधार पर टुटके बांग्लादेश अस्तित्व में आएल ।
ओइसे ही नेपालमे मधेश केन्द्रित राजनीतिके पुराना खेलाडी महंथ ठाकुर और राजेन्द्र महतो नेपालके द्वि राष्ट्रीय राज्य मानित रहे अर्थात नेपाल राज्यमे मधेशीके राष्ट्रीयता और पहाड़ीके राष्ट्रीयता अलग है । इहे मान्यताके आधार मानके एक मधेश एक प्रदेशके नारा लेके आएल रहे । सीके राउत मधेशीके छूटे राष्ट्रीयता और पहाड़ीके छूटे राष्ट्रीयता होएला के कारण मधेशीके लागी स्वतंत्र राज्य अर्थात छूटे देश चाहि से नारा भी जोरसोरसे चलल रहे और एकरा लागी सांकेतिक जनमत संग्रह भी करेले रहे ।

ब-हुराष्ट्रीय :
राष्ट्रराज्य सिद्दान्त अनुसार कोनो देशमे २ से ज्यादा जाति, प्रजाति, भाषिक समुदाय व धार्मिक संप्रदाय है त उ राज्य के बहुराष्ट्रीय राज्य कही छै । संन १९७४ में जारी कएल गेल यूगोस्लावियाके संबिधान में यूगोस्लावियाके बहुराष्ट्रीय राज्य मानेको व्यवस्था कएल गेल रहे । क्रोट्स, स्लोभेन, मेसेड़ोनियन , मोन्टीनेग्रेन , सर्बस , बोस्रेन जैसन जाती, जनजातिके राष्ट्रीयताके आधार मानल रहे । तथाकथित फरक फरक “ राष्ट्रीयता” बिच घृणा, विभाजन, और प्रतिस्पर्धा पहिले से रहबे करे ऊपर से इ आग में घिउ । राष्ट्रपति जोसिप बृज टिटोके मृत्यु पश्चात घृणा, वैमनष्यता और तीब्र भेगेल ।
सन १९९१ में स्लोवेन जाती सब यूगोस्लाविया से टुकरा / बिभाजन कके स्लोवेनिया नामके स्वतंत्र देश बनल कै । एकके बाद एक अलग होते होते अभी तक ७ टुकरा में बिभाजित भेगेल है – क्रोएशिया, सर्बिया, मोंटेनेग्रो, मैसेडोनिया, बोस्निया- हर्ज़ेगोविना । बहुराष्ट्रीय राज्य यूगोस्लाविया बिभाजन कके बोस्निया- हर्ज़ेगोविना नामके द्वि-राष्ट्रीय राज्य बनल है । सन २००८ में कोसोभोले सर्बियासे स्वतंत्र होके अलग देश बनल है ।
बिखंडनके क्रम में कही प्रादेशिक सेना त कही केन्द्रीय सेनाके बिच भी भिडंत भेल त कहू एक जातीके सेना से दूसरा जातीके सेनासे भी लड़ाई लड़ल । करीब डेढ़ लाख आदमी मरल और युगोसलाभिया टुकरा टुकरा भी भेल ।
बहुत दिन न भेल है – इथियोपिया के प्रधानमन्त्री अबी अहमद अपने ही देशके बिरुद्ध युद्धके घोषणा कदेल कई । कोरोना संक्रमण के कारण इथियोपियाके केंद्र सरकार चुनावके समय पछाड़ी सार देले रहे । लेकिन टिग्रे प्रदेश न मानल इ बात और अपना प्रदेश में चुनाव कराबे के लागी अगाडी बढ्गेल । ओकरा बाद केन्द्रीय सेना और टिग्रे प्रदेशके सेनामें भिडंत शुरू भेगेल । छिमेकी राष्ट्र इरिट्रिया भी टिग्रे प्रदेश विरुद्ध अपन सेना पठादेले है । करीब ५२ हजार जनता मारल गेल है से बात बिपक्षीके संयुक्त विज्ञप्ति में उल्लेख है । ३० लाखसे जादा विस्थापित भेगेल और अभी तक युद्ध न रुकल है । ऊपरसे कोरोना के कारण चुनाव स्थगित कएल गेल है जेइसन लागी छै लेकिन इथियोपियाके केन्द्रीय सेना और प्रादेशिक सेना बिचके द्वन्द के मूल जड संबिधान ही है ।

इथियोपियाके बहुराष्ट्रीय राज्य मानल गेल है संबिधान में । सन १९९४ में जारी इथियोपियाके संबिधानके धारा ३९ के उपधारा १ में कोनो भी राष्ट्र, राष्ट्रीयता और जनताके स्वशासनके साथ निशर्त विखंडनमें जायेके अधिकार रहते से प्रष्ट लिखल है ।
सन २०१७ में स्पेनके क्याटालोनियामें विखंडनके लागी जनमत संग्रह भेल और ९० % जनता स्पेनसे क्याटालोनिया अलग होएके चाहि से मत देलक । लेकिन स्पेनके केंद्रीय सरकार स्वतंत्रताके निमित कएल गेल जनमतके गैर कानून घोषणा कके क्याटालोनियाके तत्कालीन राष्टपति कालर्स पुग्देमोंट लगायेत अन्य पदाधिकारि सबके पकड़ लेल कै । अभी पुग्देमोंट निर्वासित होगेल है । इहा समस्या क्याटोलोनिया के जनमत संग्रह, कानून प्रक्रिया पूरा कएले है की न , से बात न है । समस्या सन १९७८ में जारी कएल गेल स्पेनके संविधानके धारा २ में “स्पेनके राष्ट्रीयता सबके स्वशासन पूर्ण अधिकारके ग्यारेन्टी करते “ से लिखल है । समाज में रहल विविधता “ राष्ट्रीयता” अनुसार १७ गो जातीय राज्य बनगेल है और ओही राष्ट्रीयताके आधार बनाके स्पेन जैसन विकसित देशमे समेत प्रयास हो रहल है – येई से प्रमाणित होई छै की बहुराष्ट्रीयता राज्य केतना निकृष्ट है से ।
कथित जनयुद्धके नाममे विभिन्न जातीय मुक्ति मोर्चा खोलके समूह पिच्छे राज्य आश्वासन देले बाबुराम भट्टराई और नेपालमे पहाड़ी – मधेशी २ टा राष्ट्रीयता है से महंथ ठाकुर और राजेन्द्र महतो एक होके जनता समाजबादी पार्टी बनैलक । जसके घोषणापत्रमें नेपालके बहुराष्ट्रीय राज्य संबिधानमें लिखाके प्रदेश सबके पुनर्संरचना करायेम से उल्लेख है । एकर मतलव नेपाली समाजमें स्थित जातीय, भाषिक , सांस्कृतिक, धार्मिक विविधता के “ राष्ट्रीयता “ मानके और ओही राष्ट्रीयता पर आधारित होके ११ गो राष्ट्रीय / जातीय राज्य बनाबे के उद्देश्य है ।

राष्ट्रराज्य सिद्दान्त अन्तर्गत बनल बहुराष्ट्रीय राज्य बहुत ही घातक है से बात युगोस्लोबिया जेइसन कम्युनिष्ट शासन रहल देश होए या इथियोपिया जेइसन गरीव देश या स्पेन जेइसन समृद्ध देश वहां प्रष्ट है सब बात । बिष कोनो पीते उ अपन गुण न छोड़ते ।
नेपालमे कोनो एगो वडा न होतई जहाँ एके गो जाती, एकेगो भाषा, एकेगो धार्मिक संप्रदाय मात्र रहल है । नेपालके सब क्षेत्र विविधतायुक्त है -एइसन विविधतायुक्त समाजमे गतार्थ एवं असान्दर्भिक वेस्टफेलिया संधि द्वारा निर्मित राष्ट्रीयता लादके घृणा, हत्या हिंसा और अन्त्तत: विभाजन करेला कुछ व्यक्ति और विचार नियोजित रूपसे लागल है । इ बिभाजनके जड़ संविधानमें प्रवेश कराके मुठिभरके पदलोलुप पात्र सब निर्माण कैले “ पहिचान और सामर्थ्य “ के दायरा में न परल समूह चुप लाग के रहते ? एक मगर नामके जातीय राज्यमे काईके, खाम र ढुट मगर के पहिचान के संरक्षण करते ? मगर राज्य के भीतर काईके , खाम र ढुट मगर भाषाके आधार पर कम्तिमे गैर भौगोलिक राज्य खोज तै तब की होतई ? है एकर कोनो जवाफ ? यी त जातिके उदाहरण मात्र है ।
नेपालमे लगभग १२५ जातजाती , १२९ भाषा भाषी , आधा दर्जन धार्मिक संप्रदाय भी अपना “ राष्ट्रीयता “ के आधार पर राज्य निर्माण के आकांक्षा रखते त एकर जवाफ ? कुछ ख़ास पात्र सब मिलके बनैले पहिचान और सामर्थ्य मापदंडमें हम सब न परि छि से चुप लागके बैठ तै से सोचले है की ?

समाधान है राज्यराष्ट्र सिद्दान्त:
राष्टराज्य सिद्दान्त नेपालके लागी मात्र न की पूरा विश्वके लागी सरदर्द के बिषय बन गेल है । बिश्व भर में लगभग ३०० विद्रोही समूह है जे जाति, प्रजाति, भाषा, संप्रदाय पर आधारित “ राष्ट्रीयता “ मानके ओही आधार पर राज्य निर्माण करेला,कहू हतियार उठैले है त कहू आवाज मात्र ।
वेस्टफेलिया के संधिसे निर्माण भेल राष्ट्रीयताके संकीर्ण परिभाषासे आएल वैश्विक समस्याके समाधान स्वरुप विक्रम संवत २०७३ सालमें युगद्रष्टा डा. निर्मलमणि अधिकारी “राज्यराष्ट” सिद्दान्त अभी निर्माण कैले छत । हिन्दू, बौद्ध, बॉन, जैन और किरात जोन नेपालके मौलिक धार्मिक संप्रदाय अंगीकार कैले उदार राष्ट्रीयताके चिंतन बोक्ले “राज्यराष्ट सिद्दान्त” क्याथोलिक और प्रोटेस्टान्टके द्वन्द्वसे सिर्जित राष्ट्रराज्य सिद्दान्तसे आएल वैश्विक समस्याके समाधान देती । येई भूखंडमें कौटिल्यके “ अर्थशास्त्र “ के २३०० वर्ष बाद बनल राजनितिक सिद्दान्त – राज्यराष्ट सिद्दान्त है । मौलिक जरो किलो पार्टी अपन राजनीतिक सिद्दान्तके रुपमे राज्यराष्ट सिद्दान्तके अंगीकार कैले है ।
मुख्य बात पहिचानके राजनीति या पहिचानके संस्कृति । अपन पहिचान सबके प्यारे, दिलसे जोड़ल रहबे करी छै । सांस्कृतिक पहिचानके संरक्षण और प्रबर्धन त होई के चाही एइमे कोनो २ मतके बात न है । लेकिन पहिचानके नाममें एकरा राजनीतिक बिषय बनतै त दूसरा पहिचानधारी भी राजीनीतिक बिषय बनतै । जेकरा कारण द्वन्द अतै जोन पहिचानके संरक्षण न कके – एक बिरुद्ध दोसर उतरके उल्टे पहिचान नाश होएके संभावना प्रबल है । जमीन परके उठाबेके चक्करमें जेबीमे के भी गिर जाई ।
राज्यराष्ट्रके सबसे प्रमुख विशेषता, संस्कृति पहिचानके ग्यारेन्टी करी छै । नागरिक और राजनीतिक अधिकारके परिप्रेक्ष्यमे व्यक्ति ही प्रमुख इकाई रही छै तथा सांस्कृतिक अधिकारके प्रत्याभूत करित काल सांस्कृतिक समूह, संप्रदाय, समुदाय, जाती, प्रजाति या भौगोलिक पहिचानके आधारमें बनल अवयवके प्रधान इकाई मानी छै । सांस्कृतिक अधिकारके प्रयोग करित समय उ अवयव अग्राधिकार प्राप्त करी छै । अर्थात राज्यराष्ट सिद्दान्तके अवलंबन पश्चात नागरिक तथा राजनीतिक अधिकार के क्षेत्रमें ३ करोड़ नेपालीके अधिकार बराबर रहतै ।
सम्पतिके अधिकार जेतना पूर्वके लिम्बूके है ओतने पश्चिमके थारुके भी रहतै । वाक् स्वतन्त्रताके उपयोग जेतना उतरके शेर्पा करते ओहिने दक्षिणके मधेशीके भी रहती । प्रत्येक नागरिक एकाईके रुपमे रहतै और ओई एकाई द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि एई क्षेत्रमें करतै ओहिने सांस्कृतिक अधिकारके क्षेत्रमें सांस्कृतिक अवयवके प्रधान एकाई मानके ओइके प्रतिनिधि द्वारा होतई । नेवारके गुठी सम्बन्धी निति नियम नेवारके ही सांस्कृतिक प्रतिनिधि करे वाला ब्यवस्था है राज्यराष्ट्र । थारुके बड्घर सम्बन्धी निति नियम थारुके सांस्कृतिक प्रतिनिधि करे वाला व्यवस्था है राज्यराष्ट्र । थाकखोलाके ल्ह फेवके कइसन व्यवस्थापन करे परतै ओकर व्यवस्था थकालीके सांस्कृतिक प्रतिनिधिके अधिकार क्षेत्र में परी छै । कोन पाछासे कइसन रीती बसाबे के है उ अधिकार कोयु नक्छो के है । लिम्बूके साप्पोक चोमेंसे लेके खाउमा सबके निर्णय फेदांग , साम्बा, और येवा – येमाके अधिकार क्षेत्र में है ।
जनकपुर जानकी मंदिरके सारा रेख्देख तथा ओकर व्यवस्था ओही लंगके सांस्कृतिक प्रतिनिधि के अधिकार के क्षेत्र में रहतै – बाहिरिया आके उहा अपन सांस्कृतिक रीती रिवाज़ न थापे वाला व्यवस्था है राज्यराष्ट्र ।
राज्यराष्ट्र सिद्दान्त नेपालके सब जाती, जनजाति अपन कुल परम्परासे मानल आ रहल सांस्कृतिक सम्पदाके अवलंबन, संरक्षण और प्रवर्धन करे के अधिकार उहाके सांस्कृतिक समुदायके अग्राधिकार रहे के व्यवस्था है । लेकिन सांस्कृतिक पहिचान के राष्ट्रीयता पर आधारित राज्य बनाबे खोजे – वेस्टफेलिया से आयातित अजेंडा खारिज करे के व्यवस्था है राज्यराष्ट्र ।
राष्ट्रीयताके परिभाषा के निमित राज्य ही निर्णायक तत्व होएलाके कारण जन्मके आधार पर प्राप्त विशेषता देखाके राज्य निर्माण करे के निम्ति होयेवाला खीचातानी, घृणा और विभाजनके संभावना सबके राज्यराष्ट सिद्दान्त ओकरा जड़ से ही समाधान करी छै ।

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